शनिवार, 9 अप्रैल 2011

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3 टिप्‍पणियां:

  1. क्योंकि हम खुद इससे कहीं न कहीं .........कम या ज्यादा जुड़े हुए हैं. ऑफिस के दो बाबुओं ने रिश्वत के बटवारे को लेकर मुझसे कहा " सर आप ही बताइये मैं कहाँ गलत हूँ, क्या मेरा पेट नहीं है ..सारा का सारा वही क्यों रखेगा ....मैं अगर अपना हिस्सा मांगता हूँ तो ये झगड़ा करता है ...अब आप ही न्याय की बात करिए". मैं उनका समझौता नहीं करवा सका....क्योंकि झगड़े का कारण ही अन्याय की पृष्ठभूमि पर बुना गया था.

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  2. मिसिर जी आपसे अनुरोध है १- कि फॉण्ट का रंग श्वेत की अपेक्षा हल्का नीला कर दें तो पढ़ने में सुविधा होगी. २- टिप्पणियों के लिए शब्द पुष्टिकरण हटा दें तो टिप्पणी करने में कम समय लगेगा.

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